श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.35.22 
रुद्रादित्या वसवो ये च साध्या
विश्वेऽश्विनौ मरुतश्चोष्मपाश्च ।
गन्धर्वयक्षासुरसिद्धसङ्घा
वीक्षन्ते त्वां विस्मिताश्चैव सर्वे ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
शिव के विभिन्न रूप, आदित्य, वसु, साध्य, विश्वेदेव, दोनों अश्विनीकुमार, मरुद्गण, पितृगण, गंधर्व, यक्ष, असुर और सिद्धदेव सभी आश्चर्य से आपकी ओर देख रहे हैं।
 
Various forms of Shiva, Adityas, Vasus, Sadhya, Vishvedev, both Ashwinikumars, Marudgan, Pitrugan, Gandharva, Yaksha, Asura and Siddhadev are all looking at you with surprise.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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