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mahabharat 6.35.21: समस्त देवगण आपकी शरण में आकर आपमें प्रवेश कर रहे हैं। उनमें से कुछ अत्यंत भयभीत होकर हाथ जोड़कर आपकी स्तुति कर रहे हैं। महर्षियों और सिद्धों के समूह वैदिक ऋचाओं का पाठ कर रहे हैं और "आपका कल्याण हो" कहकर आपकी स्तुति कर रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 35: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 11: विराट रूप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.35.21 
अमी हि त्वां सुरसङ्घा विशन्ति
केचिद्भ‍ीता: प्राञ्जलयो गृणन्ति ।
स्वस्तीत्युक्त्वा महर्षिसिद्धसङ्घा:
स्तुवन्ति त्वां स्तुतिभि: पुष्कलाभि: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
समस्त देवगण आपकी शरण में आकर आपमें प्रवेश कर रहे हैं। उनमें से कुछ अत्यंत भयभीत होकर हाथ जोड़कर आपकी स्तुति कर रहे हैं। महर्षियों और सिद्धों के समूह वैदिक ऋचाओं का पाठ कर रहे हैं और "आपका कल्याण हो" कहकर आपकी स्तुति कर रहे हैं।
 
The whole group of Devas are taking refuge in you and entering you. Some of them are praying to you with folded hands in extreme fear. Groups of Maharishis and Siddhas are reciting Vedic hymns and praising you saying “May you be blessed”.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)