Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.35.19: आप आदि, मध्य और अंत से रहित हैं। आपकी महिमा अनंत है। आपकी असंख्य भुजाएँ हैं और सूर्य-चंद्रमा आपके नेत्र हैं। मैं आपके मुख से प्रज्वलित अग्नि निकलते हुए और आपके तेज से यह संपूर्ण ब्रह्मांड जलता हुआ देख सकता हूँ। | mahabharat अध्याय 6.35: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11: विराट रूप । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप आदि, मध्य और अंत से रहित हैं। आपकी महिमा अनंत है। आपकी असंख्य भुजाएँ हैं और सूर्य-चंद्रमा आपके नेत्र हैं। मैं आपके मुख से प्रज्वलित अग्नि निकलते हुए और आपके तेज से यह संपूर्ण ब्रह्मांड जलता हुआ देख सकता हूँ।
You are without beginning, middle and end. Your glory is infinite. You have innumerable arms and the sun and moon are your eyes. I can see blazing fire coming out of your mouth and this entire universe burning with your brilliance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥