Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.34.9: मेरे शुद्ध भक्तों के विचार मुझमें ही निवास करते हैं, उनका जीवन मेरी सेवा में समर्पित रहता है और वे एक-दूसरे को ज्ञान प्रदान करने तथा मेरे विषय में चर्चा करने में परम संतोष और आनंद का अनुभव करते हैं। | mahabharat अध्याय 6.34: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्त: परस्परम् ।
कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च ॥ ९ ॥
अनुवाद
मेरे शुद्ध भक्तों के विचार मुझमें ही निवास करते हैं, उनका जीवन मेरी सेवा में समर्पित रहता है और वे एक-दूसरे को ज्ञान प्रदान करने तथा मेरे विषय में चर्चा करने में परम संतोष और आनंद का अनुभव करते हैं।
The thoughts of My pure devotees reside in Me, their lives are dedicated to My service and they experience supreme satisfaction and joy in imparting knowledge to one another and talking about Me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥