श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.34.41 
यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा ।
तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोऽशसम्भवम् ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
तुम्हें यह जानना चाहिए कि समस्त ऐश्वर्य, सौंदर्य और शानदार रचनाएँ मेरी ही चमक की एक चिंगारी से उत्पन्न हुई हैं।
 
You should know that all the opulence, beauty and splendid creations have originated from just a spark of my radiance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)