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mahabharat 6.34.38: अराजकता को दबाने के सभी साधनों में मैं दंड हूँ, और विजय की आकांक्षा रखने वालों में मैं नीति हूँ। रहस्यों में मैं मौन हूँ, और ज्ञानियों में मैं ज्ञान हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.34.38 
दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम् ।
मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम् ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
अराजकता को दबाने के सभी साधनों में मैं दंड हूँ, और विजय की आकांक्षा रखने वालों में मैं नीति हूँ। रहस्यों में मैं मौन हूँ, और ज्ञानियों में मैं ज्ञान हूँ।
 
Of all the means of suppressing anarchy, I am punishment, and of those who aspire for victory, I am policy. Among mysteries, I am silence, and among the wise, I am wisdom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)