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mahabharat 6.34.37: मैं वृष्णियों में वासुदेव हूँ, पाण्डवों में अर्जुन हूँ, मैं समस्त ऋषियों में व्यास हूँ और महान विचारकों में उशना हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.34.37 
वृष्णीनां वासुदेवोऽस्मि पाण्डवानां धनञ्जय: ।
मुनीनामप्यहं व्यास: कवीनामुशना कवि: ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
मैं वृष्णियों में वासुदेव हूँ, पाण्डवों में अर्जुन हूँ, मैं समस्त ऋषियों में व्यास हूँ और महान विचारकों में उशना हूँ।
 
I am Vasudeva among the Vrishnis and Arjuna among the Pandavas. I am Vyasa among all sages and Ushna among great thinkers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)