श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.34.33 
अक्षराणामकारोऽस्मि द्वन्द्व: सामासिकस्य च ।
अहमेवाक्षय: कालो धाताहं विश्वतोमुख: ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
अक्षरों में 'अ' अक्षर हूँ और समासों में 'द्वन्द्व समास' हूँ। मैं नित्य काल भी हूँ और सृष्टिकर्ताओं में 'ब्रह्मा' हूँ।
 
Among letters I am the letter A and among compounds I am the Dvandva Samas. I am also the eternal time and among creators I am Brahma.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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