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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य
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श्लोक 30
श्लोक
6.34.30
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां काल: कलयतामहम् ।
मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् ॥ ३० ॥
अनुवाद
मैं राक्षसों में भक्त प्रह्लाद हूँ, अत्याचारियों में मृत्यु हूँ, पशुओं में सिंह हूँ और पक्षियों में गरुड़ हूँ।
Among the demons I am devotee Prahlada, among the oppressors I am Death, among the animals I am a lion and among the birds I am Garuda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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