vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य
»
श्लोक 30
श्लोक
6.34.30
प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां काल: कलयतामहम् ।
मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम् ॥ ३० ॥
अनुवाद
मैं राक्षसों में भक्त प्रह्लाद हूँ, अत्याचारियों में मृत्यु हूँ, पशुओं में सिंह हूँ और पक्षियों में गरुड़ हूँ।
Among the demons I am devotee Prahlada, among the oppressors I am Death, among the animals I am a lion and among the birds I am Garuda.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd