श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.34.3 
यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् ।
असम्मूढ: स मर्त्येषु सर्वपापै: प्रमुच्यते ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
मनुष्यों में वही एकमात्र ऐसा है जो समस्त मोहों तथा पापों से मुक्त है, जो मुझे अजन्मा, सनातन तथा सम्पूर्ण लोकों का स्वामी जानता है।
 
He alone among men is free from all delusions and all sins, who knows Me as the unborn, the eternal, the Lord of all the worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)