vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य
»
श्लोक 28
श्लोक
6.34.28
आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक् ।
प्रजनश्चास्मि कन्दर्प: सर्पाणामस्मि वासुकि: ॥ २८ ॥
अनुवाद
मैं शस्त्रों में वज्र, गायों में सुरभि, संतानोत्पत्ति के कारणों में कामदेव तथा सर्पों में वासुकि हूँ।
I am Vajra among weapons, Surabhi among cows, Kamadeva, the god of love among the causes of progeny and Vasuki among serpents.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd