श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.34.28 
आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक् ।
प्रजनश्चास्मि कन्दर्प: सर्पाणामस्मि वासुकि: ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
मैं शस्त्रों में वज्र, गायों में सुरभि, संतानोत्पत्ति के कारणों में कामदेव तथा सर्पों में वासुकि हूँ।
 
I am Vajra among weapons, Surabhi among cows, Kamadeva, the god of love among the causes of progeny and Vasuki among serpents.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd