श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.34.27 
उच्‍चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भ‍वम् ।
ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम् ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
घोड़ों में मुझे उच्चैःश्रवा जानो, जो अमृत के लिए समुद्र मंथन के समय उत्पन्न हुआ था। हाथियों में मैं ऐरावत हूँ और मनुष्यों में मैं राजा हूँ।
 
Among horses, know me as Ucchaihshrava, who was born during the churning of the ocean for nectar. Among elephants, I am Airavat and among men, I am the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)