| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य » श्लोक 25 |
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| | | | श्लोक 6.34.25  | महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम् ।
यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालय: ॥ २५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | मैं महर्षियों में भृगु हूँ, वाणी में दिव्य ओंकार हूँ, समस्त यज्ञों में पवित्र नाम का कीर्तन हूँ तथा समस्त स्थावर वस्तुओं में हिमालय हूँ। | | | | I am Bhrigu among the great sages, the divine Omkar among speech, the chanting of the holy name in all sacrifices and the Himalayas among all immovable things. | | ✨ ai-generated | | |
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