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mahabharat 6.34.20: हे अर्जुन! मैं समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित परम पुरुष हूँ। मैं ही समस्त प्राणियों का आदि, मध्य और अन्त हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.34.20 
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थित: ।
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! मैं समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित परम पुरुष हूँ। मैं ही समस्त प्राणियों का आदि, मध्य और अन्त हूँ।
 
O Arjuna! I am the Supreme Being situated in the hearts of all beings. I am the beginning, middle and end of all beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)