श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.34.2 
न मे विदु: सुरगणा: प्रभवं न महर्षय: ।
अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वश: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
मेरी उत्पत्ति या महिमा को न तो देवता जानते हैं और न ही महर्षि, क्योंकि मैं सब प्रकार से देवताओं और महर्षियों का भी कारण (उत्पत्ति) हूँ।
 
Neither the gods nor the great sages know about my origin or glory, because in every way I am the cause (origin) of the gods and the great sages as well.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd