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श्लोक 6.34.2  |
न मे विदु: सुरगणा: प्रभवं न महर्षय: ।
अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वश: ॥ २ ॥ |
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| अनुवाद |
| मेरी उत्पत्ति या महिमा को न तो देवता जानते हैं और न ही महर्षि, क्योंकि मैं सब प्रकार से देवताओं और महर्षियों का भी कारण (उत्पत्ति) हूँ। |
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| Neither the gods nor the great sages know about my origin or glory, because in every way I am the cause (origin) of the gods and the great sages as well. |
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