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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 34: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10: श्रीभगवान् का ऐश्वर्य
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श्लोक 16
श्लोक
6.34.16
वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतय: ।
याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि ॥ १६ ॥
अनुवाद
कृपया मुझे अपने दिव्य ऐश्वर्य के विषय में विस्तार से बताइये, जिसके द्वारा आप समस्त लोकों में व्याप्त हैं।
Kindly tell me in detail about Your divine opulences by which You pervade all these worlds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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