Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.33.5: हालाँकि, मेरे द्वारा रचित सभी वस्तुएँ मुझमें नहीं रहतीं। मेरी योगिक महिमा तो देखो! यद्यपि मैं सभी प्राणियों का पालनहार हूँ और सर्वत्र व्याप्त हूँ, फिर भी मैं इस विशाल जगत का भाग नहीं हूँ, क्योंकि मैं ही सृष्टि का कारण हूँ। | mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम् ।
भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावन: ॥ ५ ॥
अनुवाद
हालाँकि, मेरे द्वारा रचित सभी वस्तुएँ मुझमें नहीं रहतीं। मेरी योगिक महिमा तो देखो! यद्यपि मैं सभी प्राणियों का पालनहार हूँ और सर्वत्र व्याप्त हूँ, फिर भी मैं इस विशाल जगत का भाग नहीं हूँ, क्योंकि मैं ही सृष्टि का कारण हूँ।
However, all the things created by me do not remain in me. Just look at my yogic glory! Although I am the caretaker of all beings and pervade everywhere, I am not a part of this vast manifestation, for I am the cause of creation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥