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श्लोक 4
श्लोक
6.33.4
मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना ।
मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थित: ॥ ४ ॥
अनुवाद
यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड मेरे अव्यक्त रूप से व्याप्त है। सभी जीव मुझमें हैं, किन्तु मैं उनमें नहीं हूँ।
This entire universe is pervaded by my unmanifested form. All living entities are in me, but I am not in them.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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