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mahabharat 6.33.33: फिर पुण्यात्मा ब्राह्मणों, भक्तों और राजाओं के विषय में तो कहना ही क्या है! अतः इस क्षणिक दुःखमय संसार में आकर मेरी प्रेममयी भक्ति में लग जाओ।   |   mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.33.33 
किं पुनर्ब्राह्मणा: पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा ।
अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
फिर पुण्यात्मा ब्राह्मणों, भक्तों और राजाओं के विषय में तो कहना ही क्या है! अतः इस क्षणिक दुःखमय संसार में आकर मेरी प्रेममयी भक्ति में लग जाओ।
 
Then what more can be said about the virtuous Brahmins, devotees and kings! Therefore, having come to this temporary sorrowful world, devote yourself to my loving devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)