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mahabharat 6.33.32: हे पार्थ! जो मनुष्य मेरी शरण में आते हैं, वे चाहे नीच कुल में जन्मी स्त्री, वैश्य (व्यापारी) और शूद्र (मजदूर) ही क्यों न हों, वे परमधाम को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.33.32 
मां हि पार्थ व्यपाश्रित्य येऽपि स्यु: पापयोनय: ।
स्त्रियो वैश्यास्तथा श‍ूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम् ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
हे पार्थ! जो मनुष्य मेरी शरण में आते हैं, वे चाहे नीच कुल में जन्मी स्त्री, वैश्य (व्यापारी) और शूद्र (मजदूर) ही क्यों न हों, वे परमधाम को प्राप्त होते हैं।
 
O Partha! Those who take refuge in me, even if they are low-born women, Vaishyas (merchant) and Shudras (laborers), they attain the Supreme Abode.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)