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mahabharat 6.33.28: इस प्रकार तुम कर्म के बंधन और उसके शुभ-अशुभ फलों से मुक्त हो जाओगे। इस संन्यास योग में मन को स्थिर करके तुम मुक्त हो जाओगे और मेरे पास आ सकोगे।   |   mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.33.28 
श‍ुभाश‍ुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनै: ।
सन्न्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार तुम कर्म के बंधन और उसके शुभ-अशुभ फलों से मुक्त हो जाओगे। इस संन्यास योग में मन को स्थिर करके तुम मुक्त हो जाओगे और मेरे पास आ सकोगे।
 
In this way you will be free from the bondage of karma and its good and bad results. By steadying your mind in this sannyasa yoga, you will be free and will be able to come to me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)