श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.33.21 
ते तं भुक्त्वा स्वर्गलोकं विशालं
क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोकं विशन्ति ।
एवं त्रयीधर्ममनुप्रपन्ना
गतागतं कामकामा लभन्ते ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जब वे (उपासक) विशाल स्वर्गीय सुखों का भोग कर लेते हैं और उनके पुण्य कर्मों का फल क्षीण हो जाता है, तब वे इस मृत्युलोक में लौट आते हैं। इस प्रकार जो तीनों वेदों के सिद्धांतों पर दृढ़ रहते हैं और इंद्रिय-सुखों की खोज करते हैं, वे ही जन्म-मृत्यु के चक्र को प्राप्त होते हैं।
 
Thus when they (worshippers) enjoy the vast heavenly pleasures and the fruits of their pious deeds get exhausted, they return to this mortal world. Thus, those who remain steadfast in the principles of the three Vedas and search for sense-pleasures, they only get the cycle of birth and death.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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