Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.33.19: हे अर्जुन! मैं ही उष्णता प्रदान करने वाला, वर्षा को रोकने वाला और वर्षा लाने वाला हूँ। मैं ही अमरता हूँ और मैं ही मृत्यु हूँ। आत्मा और जड़ (सत् और असत्) दोनों ही मुझमें हैं। | mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तपाम्यहमहं वर्षं निगृह्णाम्युत्सृजामि च ।
अमृतं चैव मृत्युश्च सदसच्चाहमर्जुन ॥ १९ ॥
अनुवाद
हे अर्जुन! मैं ही उष्णता प्रदान करने वाला, वर्षा को रोकने वाला और वर्षा लाने वाला हूँ। मैं ही अमरता हूँ और मैं ही मृत्यु हूँ। आत्मा और जड़ (सत् और असत्) दोनों ही मुझमें हैं।
O Arjuna! I am the one who provides warmth and stops the rain and brings it. I am immortality and I am death itself. Both the soul and matter (true and unreal) are in me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥