| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान » श्लोक 18 |
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| | | | श्लोक 6.33.18  | गतिर्भर्ता प्रभु: साक्षी निवास: शरणं सुहृत् ।
प्रभव: प्रलय: स्थानं निधानं बीजमव्ययम् ॥ १८ ॥ | | | | | | अनुवाद | | मैं ही लक्ष्य, रक्षक, स्वामी, साक्षी, निवास, आश्रय और परम प्रिय मित्र हूँ। मैं ही सबका सृजन और संहार, आधार, आश्रय और अविनाशी बीज हूँ। | | | | I am the goal, the protector, the master, the witness, the abode, the refuge and the most dear friend. I am the creation and the destruction, the foundation, the shelter and the indestructible seed of everything. | | ✨ ai-generated | | |
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