| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान » श्लोक 17 |
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| | | | श्लोक 6.33.17  | पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामह: ।
वेद्यं पवित्रम् ॐकार ऋक् साम यजुरेव च ॥ १७ ॥ | | | | | | अनुवाद | | मैं इस जगत का पिता, माता, आश्रय और पितामह हूँ। मैं जानने योग्य, पवित्र करने वाला और ओंकार हूँ। मैं ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी हूँ। | | | | I am the father, mother, shelter and grandfather of this universe. I am the knowable, purifier and Omkar. I am also the Rigveda, Samveda and Yajurveda. | | ✨ ai-generated | | |
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