श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 33: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.33.16 
अहं क्रतुरहं यज्ञ: स्वधाहमहमौषधम् ।
मन्‍त्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्न‍िरहं हुतम् ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मैं ही कर्मकाण्ड हूँ, मैं ही यज्ञ हूँ, पितरों को अर्पित किये जाने वाले तर्पण, औषधियाँ, दिव्य ध्वनियाँ (मंत्र), घी, अग्नि और आहुति हूँ।
 
But I am the rituals, I am the Yagya, the offerings made to the ancestors, the medicines, the divine sounds (mantras), the ghee, the fire and the oblations.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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