Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.33.10: हे कुन्तीपुत्र! यह भौतिक प्रकृति मेरी ही शक्तियों में से एक है और मेरे ही अधीन कार्य करती है, जिससे सभी सजीव और निर्जीव प्राणी उत्पन्न होते हैं। इसके शासन में यह ब्रह्मांड बार-बार उत्पन्न और नष्ट होता रहता है। | mahabharat अध्याय 6.33: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कुन्तीपुत्र! यह भौतिक प्रकृति मेरी ही शक्तियों में से एक है और मेरे ही अधीन कार्य करती है, जिससे सभी सजीव और निर्जीव प्राणी उत्पन्न होते हैं। इसके शासन में यह ब्रह्मांड बार-बार उत्पन्न और नष्ट होता रहता है।
O son of Kunti! This material nature is one of my energies and functions under my supervision, from which all animate and inanimate beings are generated. Under its rule this universe is repeatedly created and destroyed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥