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mahabharat 6.32.23: हे भरतश्रेष्ठ! अब मैं तुम्हें उन विभिन्न कालों के विषय में बताऊंगा जिनमें एक योगी इस संसार से प्रयाण करने के पश्चात् या तो वापस आता है या नहीं लौटता।   |   mahabharat अध्याय 6.32: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 8: भगवत्प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 32: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 8: भगवत्प्राप्ति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.32.23 
यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिन: ।
प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! अब मैं तुम्हें उन विभिन्न कालों के विषय में बताऊंगा जिनमें एक योगी इस संसार से प्रयाण करने के पश्चात् या तो वापस आता है या नहीं लौटता।
 
O best of the Bharatas, I will now tell you about the different periods in which a Yogi, after departing from this world, either returns or does not return.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)