श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 32: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 8: भगवत्प्राप्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.32.15 
मामुपेत्य पुनर्जन्म दु:खालयमशाश्वतम् ।
नाप्‍नुवन्ति महात्मान: संसिद्धिं परमां गता: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
मुझे प्राप्त करके भक्तियोगी महापुरुष इस दुःखों से भरे हुए क्षणिक संसार में कभी नहीं लौटते, क्योंकि वे परम सिद्धि को प्राप्त कर चुके होते हैं।
 
After attaining Me, the great men who are Bhakti Yogis, never return to this temporary world full of sorrows, because they have attained the supreme perfection.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)