Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.32.11: जो वेदों को जानते हैं, ओंकार का जप करते हैं और संन्यास आश्रम के महान ऋषि हैं, वे ब्रह्म में प्रवेश करते हैं। ऐसी सिद्धि की इच्छा रखने वाले ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं। अब मैं तुम्हें वह विधि बताता हूँ जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर सकता है।   |   mahabharat अध्याय 6.32: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 8: भगवत्प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 32: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 8: भगवत्प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.32.11 
यदक्षरं वेदविदो वदन्ति
विशन्ति यद्यतयो वीतरागा: ।
यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति
तत्ते पदं सङ्ग्रहेण प्रवक्ष्ये ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
जो वेदों को जानते हैं, ओंकार का जप करते हैं और संन्यास आश्रम के महान ऋषि हैं, वे ब्रह्म में प्रवेश करते हैं। ऐसी सिद्धि की इच्छा रखने वाले ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं। अब मैं तुम्हें वह विधि बताता हूँ जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
 
Those who know the Vedas, who chant Omkar and who are great sages of the Sannyas Ashram, enter Brahma. Those who desire such siddhi (attainment) practice the vow of celibacy. Now I will tell you the method by which any person can attain salvation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)