श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 31: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 7: भगवद्ज्ञान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.31.1 
श्रीभगवानुवाच
मय्यासक्तमना: पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रय: ।
असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले, "हे पृथापुत्र! अब सुनो कि किस प्रकार तुम मेरे विचारों से परिपूर्ण होकर तथा मुझमें मन लगाकर योगाभ्यास करके मुझे बिना किसी संदेह के पूर्णतः जान सकते हो।
 
Sri Bhagavan said, "O son of Pritha! Now listen to how you can know Me completely without any doubt by being full of My thoughts and by practicing Yoga with your mind attached to Me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)