Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.30.31: जो योगी मुझ परमात्मा को एक ही जानकर भक्तिपूर्वक परमात्मा की सेवा करता है, वह सब प्रकार से मुझमें ही स्थित रहता है। | mahabharat अध्याय 6.30: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6: ध्यानयोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थित: ।
सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते ॥ ३१ ॥
अनुवाद
जो योगी मुझ परमात्मा को एक ही जानकर भक्तिपूर्वक परमात्मा की सेवा करता है, वह सब प्रकार से मुझमें ही स्थित रहता है।
The Yogi who, knowing that I and the Supreme Soul are one and the same, serves the Supreme Soul with devotion, remains always situated in Me in every way.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥