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mahabharat 6.30.25: धीरे-धीरे, पूर्ण विश्वास के साथ, बुद्धि के द्वारा अपने आपको समाधि में स्थापित करना चाहिए और इस प्रकार मन को केवल आत्मा पर ही केन्द्रित करना चाहिए तथा अन्य किसी विषय में विचार नहीं करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 6.30: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 6: ध्यानयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.30.25 
शनै: शनैरुपरमेद्‍बुद्ध्या धृतिगृहीतया ।
आत्मसंस्थं मन: कृत्वा न किञ्चिदपि चिन्तयेत् ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
धीरे-धीरे, पूर्ण विश्वास के साथ, बुद्धि के द्वारा अपने आपको समाधि में स्थापित करना चाहिए और इस प्रकार मन को केवल आत्मा पर ही केन्द्रित करना चाहिए तथा अन्य किसी विषय में विचार नहीं करना चाहिए।
 
Slowly, gradually, with full faith, one should establish oneself in samadhi through the intellect and thus concentrate the mind on the Self only and not think of anything else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)