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श्लोक  6.30.17 
युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु ।
युक्तस्वप्‍नावबोधस्य योगो भवति दु:खहा ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति अपने भोजन, शयन, मनोरंजन और कार्य की आदतों में नियमित है, वह योग के अभ्यास से सभी भौतिक क्लेशों को नष्ट कर सकता है।
 
He who is regular in his eating, sleeping, recreation and work habits can destroy all material afflictions through the practice of Yoga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)