श्रीभगवानुवाच
अनाश्रित: कर्मफलं कार्यं कर्म करोति य: ।
स सन्न्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रिय: ॥ १ ॥
अनुवाद
श्री भगवान ने कहा- जो मनुष्य कर्मफल से विरक्त है और अपने कर्तव्य का पालन करता है, वही संन्यासी और सच्चा योगी है। वह नहीं जो न अग्नि जलाता है और न कोई कर्म करता है।
Sri Bhagavan said- The man who is detached from the results of his actions and who performs his duty is a sannyasi and a real yogi. Not the one who neither lights a fire nor performs any work.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥