Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.3.85: विजय हमेशा बड़ी सेना होने से नहीं मिलती। युद्ध में विजय अक्सर अनिश्चित होती है। इसमें ईश्वर ही सबसे बड़ा सहारा है। जो युद्ध में विजयी होते हैं, वे स्वयं सिद्ध होते हैं। 85. | mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न बाहुल्येन सेनाया जयो भवति नित्यश:।
अध्रुवो हि जयो नाम दैवं चात्र परायणम्।
जयवन्तो हि संग्रामे कृतकृत्या भवन्ति हि॥ ८५॥
अनुवाद
विजय हमेशा बड़ी सेना होने से नहीं मिलती। युद्ध में विजय अक्सर अनिश्चित होती है। इसमें ईश्वर ही सबसे बड़ा सहारा है। जो युद्ध में विजयी होते हैं, वे स्वयं सिद्ध होते हैं। 85.
Victory is not always achieved by having a large army. Victory in war is often uncertain. God is the biggest support in it. Those who are victorious in the war are themselves accomplished. 85.
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वणि निमित्ताख्याने तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वमें अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णनविषयक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥