Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.3.81: महाराज! अनुनय-विनय और दान से प्राप्त विजय सर्वोत्तम मानी जाती है। शत्रु की सेना में फूट डालकर प्राप्त विजय मध्यम होती है और युद्ध में रक्तपात करके शत्रु को पराजित करके प्राप्त विजय निम्नतम श्रेणी की विजय होती है। | mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपायविजयं श्रेष्ठमाहुर्भेदेन मध्यमम्।
जघन्य एष विजयो यो युद्धेन विशाम्पते॥ ८१॥
अनुवाद
महाराज! अनुनय-विनय और दान से प्राप्त विजय सर्वोत्तम मानी जाती है। शत्रु की सेना में फूट डालकर प्राप्त विजय मध्यम होती है और युद्ध में रक्तपात करके शत्रु को पराजित करके प्राप्त विजय निम्नतम श्रेणी की विजय होती है।
King! Victory obtained by means of persuasion and donation is considered to be the best. Victory obtained by dividing the enemy's army through the strategy of division is medium and victory obtained by defeating the enemy by causing bloodshed in a war is the lowest category of victory. 81.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥