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mahabharat 6.3.80: उस समय अनेक वीर योद्धा भी उस विशाल सेना को नहीं रोक सकते। अतः बुद्धिमान राजा को चाहिए कि वह सतर्क रहे और अपनी चार मण्डलों वाली विशाल सेना को विशेष सम्मान के साथ स्थिर रखने का उपाय करे।   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  6.3.80 
नैव स्थापयितुं शक्या शूरैरपि महाचमू:।
सत्कृत्य महतीं सेनां चतुरङ्गां महीपति:।
उपायपूर्वं मेधावी यतेत सततोत्थित:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
उस समय अनेक वीर योद्धा भी उस विशाल सेना को नहीं रोक सकते। अतः बुद्धिमान राजा को चाहिए कि वह सतर्क रहे और अपनी चार मण्डलों वाली विशाल सेना को विशेष सम्मान के साथ स्थिर रखने का उपाय करे।
 
At that time, even many valiant warriors cannot stop that huge army. Therefore, a wise king should remain alert and take some measures to keep his huge army of four divisions stationary with special respect. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)