Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.3.70: हे भारत! जिस पक्ष के योद्धाओं के वचन हर्ष और उत्साह से भरे हुए हैं, जिनका मन प्रसन्न है और जिनके गले की मालाएँ मुरझाती नहीं, वे युद्ध रूपी सागर को पार कर जाते हैं। | mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हृष्टा वाचस्तथा सत्त्वं योधानां यत्र भारत।
न म्लायन्ति स्रजश्चैव ते तरन्ति रणोदधिम्॥ ७०॥
अनुवाद
हे भारत! जिस पक्ष के योद्धाओं के वचन हर्ष और उत्साह से भरे हुए हैं, जिनका मन प्रसन्न है और जिनके गले की मालाएँ मुरझाती नहीं, वे युद्ध रूपी सागर को पार कर जाते हैं।
O Bharata! The side whose warriors' words are full of joy and enthusiasm, whose minds are happy and whose garlands around their necks do not wither, they cross the ocean of war.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥