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mahabharat 6.3.69: जिनकी सेनाएँ आभूषणों, कवचों, ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित होती हैं, तथा घोड़ों की हर्षपूर्ण गर्जना या हिनहिनाहट की ध्वनि होती है और जिनके शत्रु उनकी सेना की ओर देखना भी कठिन समझते हैं, वे अपने विरोधियों पर अवश्य विजय प्राप्त करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  6.3.69 
अलङ्कारै: कवचै: केतुभिश्च
सुखप्रणादैर्हेषितैर्वा हयानाम्।
भ्राजिष्मती दुष्प्रतिवीक्षणीया
येषां चमूस्ते विजयन्ति शत्रून्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
जिनकी सेनाएँ आभूषणों, कवचों, ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित होती हैं, तथा घोड़ों की हर्षपूर्ण गर्जना या हिनहिनाहट की ध्वनि होती है और जिनके शत्रु उनकी सेना की ओर देखना भी कठिन समझते हैं, वे अपने विरोधियों पर अवश्य विजय प्राप्त करते हैं।
 
Those whose armies are adorned with ornaments, armour, flags and banners, and the sound of joyful roars or neighing of horses and whose enemies find it difficult to even look at their armies, they certainly gain victory over their opponents. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)