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mahabharat 6.3.68: शुभ और मंगलमय भाषा बोलने वाले हंस, तोते, सारस और मोर आदि पक्षी जहाँ भी सेना की परिक्रमा करते हैं (दाहिनी ओर जाते हैं), युद्ध में उस पक्ष की विजय निश्चित है, ऐसा ब्राह्मण कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  6.3.68 
कल्याणवाच: शकुना राजहंसा:
शुका: क्रौञ्चा: शतपत्राश्च यत्र।
प्रदक्षिणाश्चैव भवन्ति संख्ये
ध्रुवं जयस्तत्र वदन्ति विप्रा:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
शुभ और मंगलमय भाषा बोलने वाले हंस, तोते, सारस और मोर आदि पक्षी जहाँ भी सेना की परिक्रमा करते हैं (दाहिनी ओर जाते हैं), युद्ध में उस पक्ष की विजय निश्चित है, ऐसा ब्राह्मण कहते हैं।
 
Wherever the swans, parrots, cranes and peacocks, etc., who speak auspicious and auspicious language, circumambulate the army (go to the right), that side is sure to be victorious in the war, say the Brahmins. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)