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mahabharat 6.3.67: जिनके प्रस्थान या प्रस्थान की तैयारी के समय कौओं की मधुर ध्वनि फैलती है, उनकी विजय की घोषणा होती है। हे राजन! जो कौए पीछे काँव-काँव करते हैं, वे मानो सफलता का संदेश देते हैं और शीघ्र आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं, और जो आगे काँव-काँव करते हैं, वे मानो युद्धभूमि में जाने से रोकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.3.67 
इष्टा वाच: प्रसृता वायसानां
सम्प्रस्थितानां च गमिष्यतां च।
ये पृष्ठतस्ते त्वरयन्ति राजन्
ये चाग्रतस्ते प्रतिषेधयन्ति॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
जिनके प्रस्थान या प्रस्थान की तैयारी के समय कौओं की मधुर ध्वनि फैलती है, उनकी विजय की घोषणा होती है। हे राजन! जो कौए पीछे काँव-काँव करते हैं, वे मानो सफलता का संदेश देते हैं और शीघ्र आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं, और जो आगे काँव-काँव करते हैं, वे मानो युद्धभूमि में जाने से रोकते हैं।
 
Victory is announced to those on whose departure or preparation for departure the sweet sound of crows spreads. O King! The crows which caw behind, as if convey success and motivate one to move ahead quickly, and those which caw in front, as if prevent one from going to the battle field. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)