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mahabharat 6.3.66: जिस पक्ष में शंख और नगाड़ों की गम्भीर ध्वनि जोर-जोर से सुनाई दे रही हो तथा जिसे सूर्य और चन्द्रमा की किरणें निर्मल प्रतीत हो रही हों, उसके लिए यह भावी विजय का शुभ लक्षण कहा गया है ॥ 66॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  6.3.66 
गम्भीरघोषाश्च महास्वनाश्च
शङ्खा मृदङ्गाश्च नदन्ति यत्र।
विशुद्धरश्मिस्तपन: शशी च
जयस्यैतद् भाविनो रूपमाहु:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
जिस पक्ष में शंख और नगाड़ों की गम्भीर ध्वनि जोर-जोर से सुनाई दे रही हो तथा जिसे सूर्य और चन्द्रमा की किरणें निर्मल प्रतीत हो रही हों, उसके लिए यह भावी विजय का शुभ लक्षण कहा गया है ॥ 66॥
 
This is said to be an auspicious sign of future victory for the side where the deep sounds of conches and drums are being heard loudly and to whom the rays of the Sun and the Moon appear pure. ॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)