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mahabharat 6.3.63: व्यासजी बोले, "हे विचित्रवीर्यकुमार! हे मनुष्यों के स्वामी! आपके मन में जो भी शंकाएँ हों, उन्हें इच्छानुसार प्रकट कीजिए। मैं आपकी शंकाओं का समाधान करूँगा।" 63.   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.3.63 
व्यास उवाच
वैचित्रवीर्य नृपते यत् ते मनसि वर्तते।
अभिधत्स्व यथाकामं छेत्तास्मि तव संशयम्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी बोले, "हे विचित्रवीर्यकुमार! हे मनुष्यों के स्वामी! आपके मन में जो भी शंकाएँ हों, उन्हें इच्छानुसार प्रकट कीजिए। मैं आपकी शंकाओं का समाधान करूँगा।" 63.
 
Vyasa said, "O Vichitraviryakumar! O lord of men! Express whatever doubts you have in your mind as per your wish. I will clear your doubts." 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)