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mahabharat 6.3.56: हे राजन! अपने कुल तथा अन्य अनेक राजाओं का नाश करने के लिए ही तुमने यह राज्य रूपी विपत्ति प्राप्त की है ॥56॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  6.3.56 
कुलस्यास्य विनाशाय तथैव च महीक्षिताम्।
अनर्थो राज्यरूपेण तव जातो विशाम्पते॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! अपने कुल तथा अन्य अनेक राजाओं का नाश करने के लिए ही तुमने यह राज्य रूपी विपत्ति प्राप्त की है ॥56॥
 
O King! To destroy your clan and many other kings, you have received this calamity in the form of your kingdom. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)