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mahabharat 6.3.54: महाराज! यह काल आपके पुत्र से उत्पन्न हुआ है। वेदों में हिंसा की प्रशंसा नहीं है। हिंसा से कोई लाभ नहीं हो सकता। ॥54॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.3.54 
कालोऽयं पुत्ररूपेण तव जातो विशाम्पते।
न वध: पूज्यते वेदे हितं नैव कथंचन॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यह काल आपके पुत्र से उत्पन्न हुआ है। वेदों में हिंसा की प्रशंसा नहीं है। हिंसा से कोई लाभ नहीं हो सकता। ॥54॥
 
‘Maharaj! This Kaal has been born from your son. Violence is not praised in the Vedas. Violence cannot be of any benefit. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)