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mahabharat 6.3.52-53: हे राजन! आपको अपने भाइयों, कौरवों, सम्बन्धियों और शुभचिंतकों को धर्म का उपदेश देना चाहिए, क्योंकि आप उन सबको रोकने में समर्थ हैं। जाति-हत्या अत्यन्त नीच कर्म कहा गया है। यह मुझे अत्यन्त अप्रिय है। आपको यह अप्रिय कर्म नहीं करना चाहिए ॥ 52-53॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  6.3.52-53 
ज्ञातीनां वै कुरूणां च सम्बन्धिसुहृदां तथा॥ ५२॥
धर्म्यं देशय पन्थानं समर्थो ह्यसि वारणे।
क्षुद्रं जातिवधं प्राहुर्मा कुरुष्व ममाप्रियम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपको अपने भाइयों, कौरवों, सम्बन्धियों और शुभचिंतकों को धर्म का उपदेश देना चाहिए, क्योंकि आप उन सबको रोकने में समर्थ हैं। जाति-हत्या अत्यन्त नीच कर्म कहा गया है। यह मुझे अत्यन्त अप्रिय है। आपको यह अप्रिय कर्म नहीं करना चाहिए ॥ 52-53॥
 
‘O King! You should preach the path of Dharma to your brothers, Kauravas, relatives and well wishers, because you are capable of stopping them all. Killing of caste is said to be a very lowly deed. It is very unpleasant to me. You should not do this unpleasant deed. ॥ 52-53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)