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mahabharat 6.3.50: वैशम्पायनजी कहते हैं - नृपश्रेष्ठ! जब उनके पुत्र धृतराष्ट्र ने ऐसी सच्ची बात कही, तब बुद्धिमानों में श्रेष्ठ महर्षि व्यास कुछ देर तक विचारमग्न रहे ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.3.50 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तो मुनिस्तत्त्वं कवीन्द्रो राजसत्तम।
धृतराष्ट्रेण पुत्रेण ध्यानमन्वगमत् परम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - नृपश्रेष्ठ! जब उनके पुत्र धृतराष्ट्र ने ऐसी सच्ची बात कही, तब बुद्धिमानों में श्रेष्ठ महर्षि व्यास कुछ देर तक विचारमग्न रहे ॥50॥
 
Vaishampayanji says – Nripashrestha! When his son Dhritarashtra said such a true thing, Maharishi Vyas, the best amongst the wise, remained deep in thought for some time. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)