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mahabharat 6.3.47: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! अपने पिता व्यास के ये वचन सुनकर धृतराष्ट्र बोले - 'भगवन! मैं इसे ईश्वर का पूर्वनिर्धारित आदेश मानता हूँ; अतः यह नरसंहार अवश्य होगा।'   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.3.47 
वैशम्पायन उवाच
पितुर्वचो निशम्यैतद् धृतराष्ट्रोऽब्रवीदिदम्।
दिष्टमेतत् पुरा मन्ये भविष्यति नरक्षय:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! अपने पिता व्यास के ये वचन सुनकर धृतराष्ट्र बोले - 'भगवन! मैं इसे ईश्वर का पूर्वनिर्धारित आदेश मानता हूँ; अतः यह नरसंहार अवश्य होगा।'
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing these words of his father Vyasa, Dhritarashtra said - 'Lord! I consider this to be a pre-determined decree of God; therefore this massacre will surely take place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)