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mahabharat 6.3.46: हे भारत! यह सुनकर (और इसके परिणामों पर विचार करके) तुम्हें इस अवसर के अनुकूल उपाय करने चाहिए, जिससे यह संसार विनाश से बच जाए॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.3.46 
एतच्छ्रुत्वा भवानत्र प्राप्तकालं व्यवस्यताम्।
यथा लोक: समुच्छेदं नायं गच्छेत भारत॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! यह सुनकर (और इसके परिणामों पर विचार करके) तुम्हें इस अवसर के अनुकूल उपाय करने चाहिए, जिससे यह संसार विनाश से बच जाए॥ 46॥
 
O Bharata! Having heard this (and having considered its consequences) you should take such measures as may be appropriate for the occasion, so that this world may be saved from destruction.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)